उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kitne zaKHmon se bhar gaya hun main

कितने ज़ख़्मों से भर गया हूँ मैं

کتنے زخموں سے بھر گیا ہوں میں

शायर: Tabrez Hasan Raazii7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कितने ज़ख़्मों से भर गया हूँ मैं
अब मोहब्बत से डर गया हूँ मैं

यूँ तो ज़िंदा हूँ देखने को बस
अस्ल में कब का मर गया हूँ मैं

हादिसा हादिसा नहीं लगता
इस से इतना गुज़र गया हूँ मैं

सोचना क्या है अब मुख़ालिफ़ कौन
जंग में जब उतर गया हूँ मैं

उस ने उल्फ़त का बस किया आग़ाज़
और हद से गुज़र गया हूँ मैं

गिर गया हूँ मैं अपनी नज़रों से
कर के वा'दे मुकर गया हूँ मैं

यूँ कि मंज़िल ही मिल गई 'राज़ी'
चलते चलते ठहर गया हूँ मैं