उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum na jaano to bala se meri

तुम न जानो तो बला से मेरी

تم نہ جانو تو بلا سے میری

शायर: Aalim Akhtar Jaazib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम न जानो तो बला से मेरी
कौन जीता है दु'आ से मेरी

चलते जाते हैं सितारे गुम-सुम
कुछ बदलता है सदा से मेरी

बात तो कर लूँ मगर ज़िद कैसे
बात कच्ची है ख़ुदा से मेरी

मुझ से पहले भी कई गुज़रे हैं
कोई कह दे ये अना से मेरी

न हिले एक भी पत्ता मुझ से
बात हल्की है हवा से मेरी

जो भी आया हुआ आधा वापस
कौन टिकता है दवा से मेरी

बद-तमीज़ी तो बहुत थी उस की
फिर भी बेहतर थी वफ़ा से मेरी