उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muskura kar sawal karte hain

मुस्कुरा कर सवाल करते हैं

مسکرا کر سوال کرتے ہیں

शायर: Aalim Akhtar Jaazib10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुस्कुरा कर सवाल करते हैं
आप मुझ को निढाल करते हैं

मेरे हाथों पे रख के हाथ अपने
मेरे गालों को लाल करते हैं

मैं तो बीमार हूँ कई दिन से
मेरा क्या वो ख़याल करते हैं

कुछ करें या नहीं करें लेकिन
बात तो बे-मिसाल करते हैं

बैठे रहते हैं आस्तीनों में
दोस्त भी क्या कमाल करते हैं

मेरे होंटों पे रख के हाथ अपने
फिर मुझी से सवाल करते हैं

रोज़ इक मुद्द'आ नया पा कर
रोज़ ख़ुद को निढाल करते हैं

उन के जैसे तो आबगीनों में
साँस लेना मुहाल करते हैं

हम सरापा ही आरज़ू हैं पर
अपने हाथों का हाल करते हैं

अपने इस दिल की बात करने में
कुछ भी कहना मुहाल करते हैं