उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahe jate hain wo aisa nahin hai

कहे जाते हैं वो ऐसा नहीं है

کہے جاتے ہیں وہ ایسا نہیں ہے

शायर: Aalim Akhtar Jaazib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहे जाते हैं वो ऐसा नहीं है
सुकूँ दिल को मगर होता नहीं है

नहीं ऐसा न था वैसा नहीं है
बहाना पर कोई अच्छा नहीं है

हर इक के मसअले हैं इस जहाँ में
तुम्हारा मसअला अन्क़ा नहीं है

ब-जुज़ तिफ़्ली जवानी और पीरी
यहाँ रस्ता कोई चौथा नहीं है

तिरे चेहरे की ये जो तमकनत है
परेशाँ दिल है ये गहना नहीं है

घटा आँखों के नीचे घुल रही है
थकन से हुस्न भी बचता नहीं है

न हैराँ हो जो पानी घर में उतरे
ब-जुज़ पस्ती के ये बहता नहीं है