उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mera ghabra raha hai kuchh dinon se

दिल मिरा घबरा रहा है कुछ दिनों से

دل مرا گھبرا رہا ہے کچھ دنوں سے

शायर: Aalim Akhtar Jaazib4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल मिरा घबरा रहा है कुछ दिनों से
पर मुझे कहना नहीं कुछ आँसुओं से

हर किसी के हाथ से ढल जाते हैं ये
किस तरह उम्मीद रक्खें हम बुतों से

लुक्नत-ए-मूसा हमें क़त’अन नहीं है
उड़ रही है बात अपनी क्यों सरों से

याँ बहुत उस्ताद हैं मैं कुछ नहीं पर
सोच लेता हूँ भला अच्छे भलों से