उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum mujhe DhunDte rah jaoge pagal ki tarah

तुम मुझे ढूँडते रह जाओगे पागल की तरह

تم مجھے ڈھونڈتے رہ جاؤ گے پاگل کی طرح

शायर: Onkar Gulshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम मुझे ढूँडते रह जाओगे पागल की तरह
मैं चला जाऊँगा बरसात के बादल की तरह

जानता हूँ कि निगाहों से गिरा दोगे मुझे
क्यों सजाते हो मुझे आँख में काजल की तरह

पाँव जिस वक़्त उठाता हूँ मैं मंज़िल की तरफ़
उलझनें राह में आ जाती है दलदल की तरह

अब तो सोने भी नहीं देती तिरी याद मुझे
मेरे ख़्वाबों में खनक उठती है पायल की तरह

बे-रुख़ी ने तिरी इस मोड़ पे पहुँचाया है
अब तो बस्ती में भी डर लगता है जंगल की तरह