उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum karoge nam raushan KHub tahir mir ka

तुम करोगे नाम रौशन ख़ूब 'ताहिर' 'मीर' का

تم کرو گے نام روشن خوب طاہرؔ میرؔ کا

शायर: Tahir Saood Kiratpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम करोगे नाम रौशन ख़ूब 'ताहिर' 'मीर' का
मा-हसल ये है तुम्हारे ख़्वाब की ता'बीर का

किस तरह तश्बीह दें जन्नत से दें दोज़ख़ से दें
कौनसा नक़्शा उतारें ऐ ख़िरद कश्मीर का

शम्स-हाए-शम्स तक दामन-दरीदा हो गए
फ़ल्सफ़ा वो फ़ल्सफ़ा है फ़ल्सफ़ा तक़दीर का

मैं ज़माने को नहीं दूँगा मोहब्बत का सुबूत
वर्ना लाना कौनसा मुश्किल है जू-ए-शीर का

रात दिन 'अहद-ए-वफ़ा है शर्मसारी का शिकार
तोड़ डाला हाए क़ैदी ने भरम ज़ंजीर का

रख दिया सूरज की पेशानी पे ताबिंदा चराग़
रुख़ बदल कर रख दिया किस शख़्स ने तस्वीर का

ऐ सुख़नवर ये सुख़न के दीन की बुनियाद है
रंग ऐसा मुनफ़रिद हो जैसे 'दाग़'-ओ-'मीर' का

पहले ख़ुश-गुफ़्तार लहजा फिर सितम पर ये सितम
चश्म-ए-आहू से हसीं मौज़ू' है तक़रीर का

उस की आँखों का नशा कुछ ऐसा नश्शा है मियाँ
ज़ाइक़ा जैसे शराब-ए-फ़िक्र की तहरीर का