उर्दू शायरी · ग़ज़ल

TukDe jigar ke aankh se bare nikal gae

टुकड़े जिगर के आँख से बारे निकल गए

ٹکڑے جگر کے آنکھ سے بارے نکل گئے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

टुकड़े जिगर के आँख से बारे निकल गए
अरमान आज दिल के हमारे निकल गए

वा-हसरता कि लख़्त-ए-जिगर थे जो तिफ़्ल-ए-अश्क
आँखों के सामने से हमारे निकल गए

शो'ले हमारे आहों के ऐसे हुए बुलंद
अब्रों से आसमाँ के सितारे निकल गए

मानिंद-ए-दश्त ख़िर्क़ा हुआ कोहना ऐ 'नसीम'
दामन के हर तरफ़ से किनारे निकल गए