उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe apni fazaon par pasheman kaun dekhega

तुझे अपनी फ़ज़ाओं पर पशेमाँ कौन देखेगा

تجھے اپنی فضاؤں پر پشیماں کون دیکھے گا

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे अपनी फ़ज़ाओं पर पशेमाँ कौन देखेगा
तिरा ग़म सह के भी तुझ को परेशाँ कौन देखेगा

न आएँ वो नज़र अंदर तो बाहर की तरफ़ देखूँ
तसव्वुर है तो फिर तस्वीर-ए-जानाँ कौन देखेगा

किसी के नूर की जब दीदा-ओ-दिल में तजल्ली है
तो फिर बज़्म-ए-जहाँ के अब चराग़ाँ कौन देखेगा

सुनेगा कौन इस शोर-ए-जहाँ में धड़कनें दिल की
मिरा भीगा हुआ अश्कों से दामाँ कौन देखेगा

जहाँ सुब्ह-ए-वतन जाती है रंग-ओ-नूर बरसाती
वहाँ बे-कैफ़ सी शाम-ए-ग़रीबाँ कौन देखेगा

तिरे दर पर जमी है हर परेशाँ-हाल की नज़रें
न तू देखे तो फिर हाल-ए-परेशाँ कौन देखेगा

जहाँ ने सिर्फ़ ये देखा कि साहिल पर सलामत हूँ
उठा है जो मिरे सीने में तूफ़ाँ कौन देखेगा

'हबीब' आँखों को अपनी बंद कर के ही चलें वर्ना
सर-ए-बाज़ार बिकता ख़ून-ए-इंसाँ कौन देखेगा