उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhse jo kuchh tha zara sa wasta wo bhi gaya

तुझ से जो कुछ था ज़रा सा वास्ता वो भी गया

تجھ سے جو کچھ تھا ذرا سا واسطہ وہ بھی گیا

शायर: Sabeen Yunus7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ से जो कुछ था ज़रा सा वास्ता वो भी गया
नाम ही को जो था क़ाएम राब्ता वो भी गया

सम्त गुम थी रास्ते की बे-निशाँ थीं मंज़िलें
लम्हा लम्हा साथ था जो क़ाफ़िला वो भी गया

आसमाँ की वुसअ'तों में दीप थे जलते हुए
था तसव्वुर में नया इक रास्ता वो भी गया

दोस्तों में दुश्मनों को देख कर हैराँ हूँ मैं
आगे बढ़ जाने का था जो वलवला वो भी गया

वस्ल का भी राज़ रस्तों के कठिन होने में है
शायद अब दुश्वार था जो फ़ासला वो भी गया

सोच की उलझन सुलझती जा रही है दम-ब-दम
गुम-शुदा मंज़िल का था जो वसवसा वो भी गया

इस क़दर नज़दीक पाया दिल ने जब अपना हबीब
अब तलक क़ाएम रहा जो हौसला वो भी गया