उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haqiqaton se nazar chura ke KHayal KHwabon mein zinda rahna

हक़ीक़तों से नज़र चुरा के ख़याल ख़्वाबों में ज़िंदा रहना

حقیقتوں سے نظر چرا کے خیال خوابوں میں زندہ رہنا

शायर: Sabeen Yunus5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हक़ीक़तों से नज़र चुरा के ख़याल ख़्वाबों में ज़िंदा रहना
ज़वाल की दास्तान बन कर फ़क़त किताबों में ज़िंदा रहना

ख़ुद अपने हाथों से घर जला के फ़ज़ाएँ मस्मूम कर के सारी
झुलसते दिन और तड़पती रातों के फिर अज़ाबों में ज़िंदा रहना

हों बादा-ओ-जाम सामने गर नहीं सलामत जो दस्त-ओ-बाज़ू
तो फिर है तक़दीर तिश्नगी के इन्ही सराबों में ज़िंदा रहना

गिरे हैं कट के वो पर थी जिन की उड़ान अपनी फ़ज़ा से आगे
उतर के उन को बुलंदियों से पड़ा ख़राबों में ज़िंदा रहना

जो अपनी मर्ज़ी की जम्अ तफ़रीक़ कर के दिल को लुभा रहे हैं
नहीं ख़बर कि पड़ेगा कैसे कड़े हिसाबों में ज़िंदा रहना