उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bikhar gai hun to kya aasman mera hai

बिखर गई हूँ तो क्या आसमान मेरा है

بکھر گئی ہوں تو کیا آسمان میرا ہے

शायर: Sabeen Yunus6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिखर गई हूँ तो क्या आसमान मेरा है
ज़मीं पे पाँव नहीं ख़ाक-दान मेरा है

उतर गया है सरापा दुखों की दलदल में
जो रह गया है ज़रा सा निशान मेरा है

मिटा गई है ज़माने की दस्त-बुर्द उसे
जो सामने है खंडर सा मकान मेरा है

छुपा न पाएगा वो जुर्म दिल का ख़ूँ कर के
ख़िलाफ़ उस के चला जो बयान मेरा है

बचाएगा तुझे रस्ते की कुल्फ़तों से तमाम
तुम्हारे साथ जो रहता धियान मेरा है

ज़माने भर में ही तारीकियाँ मगर दिल में
जले हैं दाग़ तो रौशन जहान मेरा है