उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hath aage kiya aur dast-e-karam tham liya

हाथ आगे किया और दस्त-ए-करम थाम लिया

ہاتھ آگے کیا اور دست کرم تھام لیا

शायर: Sabeen Yunus5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाथ आगे किया और दस्त-ए-करम थाम लिया
सर झुका पाई तो पलकों से हरम थाम लिया

मैं ने इस दुनिया के दस्तूर से बाग़ी हो कर
हक़-ओ-इंसाफ़-ओ-मोहब्बत का अलम थाम लिया

हक़ को बातिल से मिलाते हुए देखा सब को
कुछ न कुछ सच के बताने को क़लम थाम लिया

ना-तवाँ ज़ुल्म बढ़ाते हैं ये जाना जब से
ख़ुद पे उठता हुआ हर दस्त-ए-सितम थाम लिया

ज़िंदा रहने की तमन्ना में है मरना मुश्किल
जानिब-ए-दार-ओ-रसन बढ़ता क़दम थाम लिया