उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahti hun ki main roun to manazir ro den

चाहती हूँ कि मैं रोऊँ तो मनाज़िर रो दें

چاہتی ہوں کہ میں روؤں تو مناظر رو دیں

शायर: Sabeen Yunus4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाहती हूँ कि मैं रोऊँ तो मनाज़िर रो दें
इस लहू-रंग को इक बार ही मल कर धो दें

हश्र बरपा करे दुश्मन को मिली है मोहलत
और हम पर है सितम इतना कि मंज़िल खो दें

उन को तक़दीर पे है नाज़ यक़ीं रखते हैं
कि वहाँ फूल खिलेंगे जहाँ काँटे बो दें

हर कोई धरती पे आक़ाई लिए बैठा है
बंदगी एक की है और ये हक़ किस को दें