उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhse bichhDunga tere dhyan mein rah jaunga

तुझ से बिछड़ुँगा तिरे ध्यान में रह जाऊँगा

تجھ سے بچھڑوں گا ترے دھیان میں رہ جاؤں گا

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ से बिछड़ुँगा तिरे ध्यान में रह जाऊँगा
मैं रिहा हो के भी ज़िंदान में रह जाऊँगा

वो गुज़र जाएगा सौ रास्ते कर के लेकिन
मैं कहीं वादा-ओ-पैमान में रह जाऊँगा

बाँझ पेड़ों को न काटेगा कोई दस्त-ए-अजल
मैं कि फलदार हूँ नुक़सान में रह जाऊँगा

एक लम्हा वो पज़ीराई करेगा और मैं
उम्र-भर साया-ए-एहसान में रह जाऊँगा

आग के फूल तो बुझ जाएँगे लेकिन 'शहज़ाद'
मैं सुलगता हुआ गुल-दान में रह जाऊँगा