उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhse bichhDe bhi to haalat ne rone na diya

तुझ से बिछड़े भी तो हालात ने रोने न दिया

تجھ سے بچھڑے بھی تو حالات نے رونے نہ دیا

शायर: G R Kanwal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ से बिछड़े भी तो हालात ने रोने न दिया
दिल-शिकन वक़्त के लम्हात ने रोने न दिया

दिन को फ़ुर्सत न मिली अश्क बहाने की कभी
रात आई तो मुझे रात ने रोने न दिया

उस की आँखें भी रहीं ख़ुश्क हमेशा की तरह
मुझ को भी आज किसी बात ने रोने न दिया

अश्क मायूस सवाली की तरह लौट गए
वो मिला भी तो मुलाक़ात ने रोने न दिया

उन के हिस्से का 'कँवल' शहर में तुम ही रो लो
जिन को मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया