उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhse ai hila-saz kya kahna

तुझ से ऐ हीला-साज़ क्या कहना

تجھ سے اے حیلہ ساز کیا کہنا

शायर: Rafique Dehlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ से ऐ हीला-साज़ क्या कहना
मैं कहूँ दिल का राज़ क्या कहना

मेरी क़िस्मत में लिख दिया उन को
तेरा ऐ कार-साज़ क्या कहना

जो मज़े हम ने पाए फ़ुर्क़त में
उन का बंदा-नवाज़ क्या कहना

शैख़ साहब ने मै-कदा छोड़ा
अब बने पाक-बाज़ क्या कहना

दरगुज़र कर के सब ख़ताओं को
फिर किया सरफ़राज़ क्या कहना

काश दुनिया मिरी बना दो तुम
फिर तो बंदा-नवाज़ क्या कहना

मुझ को मदहोश कर दिया तू ने
निगह-ए-नीम-बाज़ क्या कहना

मुझ को बख़्शा है एक नुक्ते में
तेरा नुक्ता-नवाज़ क्या कहना

दिल पे जो कुछ 'रफ़ीक़' के गुज़री
उस का ऐ दिल-नवाज़ क्या कहना