उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko na mila is liye aaram abhi tak

हम को न मिला इस लिए आराम अभी तक

ہم کو نہ ملا اس لیے آرام ابھی تک

शायर: Rafique Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को न मिला इस लिए आराम अभी तक
बदला न रुख़-ए-गर्दिश-ए-अय्याम अभी तक

अल्लाह तिरी शान-ए-करीमी के मैं सदक़े
बनता ही रहा ख़ैर से हर काम अभी तक

तदबीर न काम आई कोई बाद-ए-सबा की
रुख़ से न हटी ज़ुल्फ़-ए-सियह-फ़ाम अभी तक

महरूम हूँ साक़ी मैं तेरी चश्म-ए-करम से
मुझ को न मिला बज़्म में इक जाम अभी तक

बहलाता हूँ दे कर दिल-ए-मुज़्तर को तसल्ली
कटती है यूँही अपनी सहर शाम अभी तक

आदाब-ए-मोहब्बत से जो वाक़िफ़ ही नहीं थे
हैं कूचा-ओ-बाज़ार में बदनाम अभी तक

समझा था 'रफ़ीक़' अपना जिन्हें मैं ने जहाँ में
आया न मुसीबत में कोई काम अभी तक