उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon na hon phir hijab ki baaten

क्यों न हों फिर हिजाब की बातें

کیوں نہ ہوں پھر حجاب کی باتیں

शायर: Rafique Dehlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों न हों फिर हिजाब की बातें
ये हैं 'अहद-ए-शबाब की बातें

दिल ने मजबूर कर दिया हम को
वर्ना सुनते जनाब की बातें

ज़ब्त से काम ले ज़रा ऐ दिल
छोड़ भी इज़्तिराब की बातें

आप क़ाएम रहेंगे वा'दे पर
हैं ये कोरी जनाब की बातें

मुज़्तरिब देख कर कहा उस ने
कीजिए सब्र-ओ-ताब की बातें

आप से मैं ने क्या कहा आख़िर
क्यों हैं ये पेच-ओ-ताब की बातें

कब समझता है कोई उल्फ़त में
ये 'अज़ाब-ओ-सवाब की बातें

थूकिए बस हुज़ूर ग़ुस्से को
हो चुकीं बस 'इताब की बातें

जब समझते हो तुम 'रफ़ीक़' अपना
क्यों हैं फिर इज्तिनाब की बातें