उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shararat bankpan shoKHi haya ki

शरारत बाँकपन शोख़ी हया की

شرارت بانکپن شوخی حیا کی

शायर: Rafique Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शरारत बाँकपन शोख़ी हया की
करूँ तौसीफ़ मैं किस किस अदा की

किया ख़ुद फ़ाश तुम ने राज़-ए-उल्फ़त
भरी महफ़िल में जब मुझ से हया की

तसव्वुर में भी बे-पर्दा न आए
भला कुछ इंतिहा है इस हया की

जफ़ा को भी किया बदनाम तुम ने
ख़ुलूस-ए-दिल से कब कोई जफ़ा की

दिया है दर्द-ए-उल्फ़त मुझ को तुम ने
ज़हे क़िस्मत जो ये ने'मत 'अता की

दिया था दिल तुम्हें अपना समझ कर
ख़ता मुझ से हुई मैं ने ख़ता की

'रफ़ीक़' अपना नहीं कोई जहाँ में
कहा अपना जिसे उस ने दग़ा की