उर्दू शायरी · ग़ज़ल

toD Dalin sab haden aur masala hal kar diya

तोड़ डालीं सब हदें और मसअला हल कर दिया

توڑ ڈالیں سب حدیں اور مسئلہ ہل کر دیا

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तोड़ डालीं सब हदें और मसअला हल कर दिया
ख़ुद भी सौदाई हुए उस को भी पागल कर दिया

टूट कर उलझी बदन से वस्ल की सरकश हवा
एक ही झोंके ने क्या जंगल में मंगल कर दिया

तोहफ़ा-ए-दाग़-ए-तमाशा ही से हम ख़ुश थे बहुत
अब के उस ने 'इत्र भी रूमाल पर मल कर दिया

था मगर बार-ए-सफ़र इतना न था पहले कभी
इक ज़रा सी आरज़ू ने दिल को बोझल कर दिया

देखना हुस्न-ए-करामत इक निगाह-ए-नर्म से
पीर-ए-कामिल ने मिरे सोने को पीतल कर दिया

उड़ते-फिरते सर में रंगा-रंग टुकड़े अब्र के
ऐसे टकराए कि पेशानी को जल-थल कर दिया

ख़ातिमुश्शु'अरा हमें मानें न मानें वो 'ज़फ़र'
शा'इरी के दीन को हम ने मुकम्मल कर दिया