उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri zulfon ne bal khaya to hota

तिरी ज़ुल्फ़ों ने बल खाया तो होता

تری زلفوں نے بل کھایا تو ہوتا

शायर: Haidar Ali Aatish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी ज़ुल्फ़ों ने बल खाया तो होता
ज़रा सुम्बुल को लहराया तो होता

रुख़-ए-बे-दाग़ दिखलाया तो होता
गुल-ए-लाला को शरमाया तो होता

चलेगा कब्क क्या रफ़्तार तेरी
ये अंदाज़-ए-क़दम पाया तो होता

कहे जाते वो सुनते या न सुनते
ज़बाँ तक हाल-ए-दिल आया तो होता

समझता या न ऐ 'आतिश' समझता
दिल-ए-मुज़्तर को समझाया तो होता