उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri yaadon ke charaghon mein ye jalti hui raat

तिरी यादों के चराग़ों में ये जलती हुई रात

تری یادوں کے چراغوں میں یہ جلتی ہوئی رات

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी यादों के चराग़ों में ये जलती हुई रात
मिरी आँखों से छलकती रही ढलती हुई रात

सम-ए-इमरोज़ से मारा हुआ हारा हुआ दिन
किसी फ़र्दा की उमीदों पे बहलती हुई रात

कभी आँखों में रुके कोई गुज़रता हुआ पल
कभी साँसों में अटक जाती है चलती हुई रात

न टला है कभी ज़ख़्मों में सुलगता हुआ दिन
न थमी है कभी अश्कों में उबलती हुई रात

मिरे हाथों की लकीरों में मशक़्क़त दिन की
मिरे ख़्वाबों के मुक़द्दर में है ढलती हुई रात