उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri tanhai ka dukh aashkara ho raha hai

तिरी तन्हाई का दुख आश्कारा हो रहा है

تری تنہائی کا دکھ آشکارا ہو رہا ہے

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी तन्हाई का दुख आश्कारा हो रहा है
बिछड़ती साअ'तों में तू हमारा हो रहा है

हिसाब-ए-दोस्ताँ दर-दिल अगर है तो न जाने
यहाँ अब क्या मुरत्तब गोशवारा हो रहा है

अज़ाब-ए-मस्लहत की क़ैद में हैं लोग और तू
समझता है यहाँ सब का गुज़ारा हो रहा है

कहीं से इक कड़ी गुम है हमारी गुफ़्तुगू में
ब-ज़ाहिर तो ये दुख तर्सील सारा हो रहा है

अगर कोई नहीं है आईने के पार 'शहज़ाद'
तो फिर ये कौन हम पर आश्कारा हो रहा है