उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri talash ke maron ki nind puri ho

तिरी तलाश के मारों की नींद पूरी हो

تری تلاش کے ماروں کی نیند پوری ہو

शायर: Usama Zoraiz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी तलाश के मारों की नींद पूरी हो
ज़रा तू बैठ कि पैरों की नींद पूरी हो

विसाल करके जुदाई का नाम तक न रहे
फिर इतना जागें कि बरसों की नींद पूरी हो

ख़ुदा तो चाहेगा ख़्वाबों में सब रहें मसरूफ़
ख़ुदा तो चाहेगा बंदों की नींद पूरी हो

तिरा बिछड़ना कि बस जागने की दूरी पे है
तो कैसे ख़ौफ़ के मारों की नींद पूरी हो

ये रोटी पानी का झगड़ा है और लोगों का
मैं चाहता हूँ कि लोगों की नींद पूरी हो

उसी की मर्ज़ी कि कितनों का चौकिदार रहे
उसी की मर्ज़ी कि जितनों की नींद पूरी हो

जो एक जागे तो दोनों को इज़्तिराब रहे
जो एक सोए तो दोनों की नींद पूरी हो