उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pata nahin hai ki kaise pasand aaya mujhe

पता नहीं है कि कैसे पसंद आया मुझे

پتہ نہیں ہے کہ کیسے پسند آیا مجھے (ردیف .. ن)

शायर: Usama Zoraiz3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पता नहीं है कि कैसे पसंद आया मुझे
कि मैं तो फूलों में भी ख़ामियाँ निकालता हूँ

'अजब उदासी है वो भी नहीं है जिस का 'इलाज
कि आज कल तो मुलाक़ात कल पे टालता हूँ

तरक़्क़ी-याफ़ता शहरों की लड़कियों की क़सम
मैं फूल बेच के बच्चों का पेट पालता हूँ