उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam KHwahishen puri hon aab-o-dana ho

तमाम ख़्वाहिशें पूरी हों आब-ओ-दाना हो

تمام خواہشیں پوری ہوں آب و دانہ ہو

शायर: Usama Zoraiz4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम ख़्वाहिशें पूरी हों आब-ओ-दाना हो
अब इस में दिल नहीं लगता नया ज़माना हो

सब ऐसे बैठे हैं चुप-चाप तेरी सुनने को
कि जैसे तू ने कोई फ़ैसला सुनाना हो

तमाम गाँव इकट्ठा हो एक स्टेशन पर
और एक शख़्स उधर शहर से रवाना हो

किसी की सालगिरह हो किसी की बरसी पर
किसी का नौहा किसी और का तराना हो