उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dost ek sham ikaTThe to hue rone ko

दोस्त इक शाम इकट्ठे तो हुए रोने को

دوست اک شام اکٹھے تو ہوئے رونے کو

शायर: Usama Zoraiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दोस्त इक शाम इकट्ठे तो हुए रोने को
फिर भी आँसू तो बहुत कम हैं तुझे रोने को

एक हद तक मिरा बीमार अभी ज़िंदा था
और तय्यार थे सब छोटे बड़े रोने को

हम तो जैसे कि किनारे पे खड़े होते हैं
वो उदासी है कि बस बात मिले रोने को

जिस क़दर रोने की 'आदत है वो दिन दूर नहीं
लोग बुलवाएँगे मरने पे मुझे रोने को

जिस के पीछे नहीं होता कोई रोने वाला
हम बनाए गए 'ज़ोरेज़' उसे रोने को