उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri jab mehrban yaaden hui hain

तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं

تری جب مہرباں یادیں ہوئی ہیں

शायर: Chand Kakralvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी जब मेहरबाँ यादें हुई हैं
बहुत ही ख़ुशनुमा रातें हुई हैं

हवाओं से बहुत डरने लगा हूँ
घनी जब से मिरी शाख़ें हुई हैं

वो जिस दिन से हुआ है दूर मुझ से
मिरी उस से बहुत बातें हुई हैं

उन्हीं पर जी रहे हैं हम अभी तक
जो ख़्वाबों में मुलाक़ातें हुई हैं

धुआँ निकला है तेरी खिड़कियों से
मगर पुर-नम मिरी आँखें हुई हैं

तिरी ख़ुशबू फ़ज़ा में घुल गई क्या
मो'अत्तर क्यों मिरी साँसें हुई हैं