उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisa mahsus hua hai tere inam ke baad

ऐसा महसूस हुआ है तिरे इन'आम के बा'द

ایسا محسوس ہوا ہے ترے انعام کے بعد

शायर: Chand Kakralvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसा महसूस हुआ है तिरे इन'आम के बा'द
जैसे मज़दूर को मज़दूरी मिले काम के बा'द

ये मोहब्बत का सफ़र ऐसा सफ़र होता है
जिस में महसूस थकन होती है आराम के बा'द

मेरे बिस्तर पे मिरी लाश पड़ी रहती है
अपने पैकर से निकल जाता हूँ मैं शाम के बा'द

गुफ़्तुगू ख़त्म इसी वास्ते कर दी मैं ने
कौन सा नाम लिया जाता तिरे नाम के बा'द

ज़ी-शु'ऊर उस में कहाँ अहल-ए-जुनूँ जीतते हैं
इब्तिदा होती है जिस खेल की अंजाम के बा'द