उर्दू शायरी · ग़ज़ल

laga hai rog koi to jaDon mein

लगा है रोग कोई तो जड़ों में

لگا ہے روگ کوئی تو جڑوں میں

शायर: Chand Kakralvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगा है रोग कोई तो जड़ों में
उदासी क्यों है वर्ना टहनियों में

भले ही बर्फ़ की चादर उढ़ा दो
जलन फिर भी रहेगी आबलों में

हवस की उँगलियों पर आ गए हैं
थे जितने रंग तितली के परों में

बहुत नुक़्सान कर देता है पानी
ठहर जाए अगर कच्चे घरों में

तसल्ली मिल गई प्यासी ज़मीं को
हुआ टकराव जब भी बादलों में

तिरे नक़्श-ए-क़दम को छोड़ कर हम
उलझ कर रह गए हैं रास्तों में