उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hota hai mere haal ka charcha mere aage

होता है मिरे हाल का चर्चा मिरे आगे

ہوتا ہے مرے حال کا چرچا مرے آگے

शायर: Chand Kakralvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

होता है मिरे हाल का चर्चा मिरे आगे
बनता है मिरा रोज़ तमाशा मिरे आगे

अफ़सोस मिरी आँख में आँसू भी नहीं थे
दम तोड़ रहा था कोई प्यासा मिरे आगे

इतना भी उजाले न करें मेरा त'आक़ुब
आ जाए मिरे जिस्म का साया मिरे आगे

ये दौर-ए-गुज़िश्ता में था रफ़्तार का 'आलम
मंज़िल मिरे पीछे रही रस्ता मिरे आगे

इस वक़्त मैं ख़ुद लाश हूँ ख़ुद नौहा-सरा हूँ
रक्खा है मिरा अपना जनाज़ा मिरे आगे

नाकामी-ए-क़िस्मत की शुरू'आत हुई है
आता है अभी देखिए क्या क्या मिरे आगे