उर्दू शायरी · ग़ज़ल

faza behtar banana chahti hai

फ़ज़ा बेहतर बनाना चाहती है

فضا بہتر بنانا چاہتی ہے

शायर: Chand Kakralvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ज़ा बेहतर बनाना चाहती है
कली अब मुस्कुराना चाहती है

खुला रहता है दरवाज़ा भी लेकिन
हवा खिड़की से आना चाहती है

'अजब दीमक है मिट्टी में यहाँ की
नए पौदों को खाना चाहती है

मिला करते थे जिस पर दो परिंदे
वो शाख़ अब सूख जाना चाहती है