उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere safar mein mohabbat safed baal hue

तिरे सफ़र में मोहब्बत सफ़ेद बाल हुए

ترے سفر میں محبت سفید بال ہوئے

शायर: Kabeer Halati7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे सफ़र में मोहब्बत सफ़ेद बाल हुए
इस इक 'अमल में मुझे जाने कितने साल हुए

जो मुझ दरख़्त से टूटी थी रूठ कर डाली
बिछड़ के देखिए क्या आज उस के हाल हुए

वो खोटा सिक्का समझती रही हमें लेकिन
हमीं नज़र में ज़माने की बे-मिसाल हुए

बस एक मैं ही तरसता हूँ निकहत-ए-गुल को
मिरे रक़ीब तो ख़ुशबू से माला-माल हुए

बड़े सुकून से रहता है अपनी दुनिया में
वो शख़्स जिस के लिए सैकड़ों बबाल हुए

किसी ने उँगली उठाई नहीं है उस की तरफ़
हमेशा सिर्फ़ मिरी ज़ात पर सवाल हुए

हम उस की आस लगाए हुए हैं अब भी 'कबीर'
बहुत ज़माना हुआ जिस का इंतिक़ाल हुए