उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekh li duniya teri maine nawazish dekh li

देख ली दुनिया तिरी मैं ने नवाज़िश देख ली

دیکھ لی دنیا تری میں نے نوازش دیکھ لی

शायर: Kabeer Halati7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देख ली दुनिया तिरी मैं ने नवाज़िश देख ली
मेरी बर्बादी में क्या है तेरी काविश देख ली

तेरी दौलत शान-ओ-शौकत तेरे काम आई नहीं
मौत से बचने की तू ने कर के कोशिश देख ली

'इश्क़ का मतलब समझ पाया नहीं तू आज तक
बद-हवस इंसान मैं ने तेरी ख़्वाहिश देख ली

उठ गया दुनिया से जैसे पर्दा-दारी का चलन
हर तरफ़ आँखों ने जिस्मों की नुमाइश देख ली

कोशिश-ए-इख़्फ़ा-ए-राज़-ए-'इश्क़ मुमकिन ही नहीं
मैं ने उस के सामने कर के ये कोशिश देख ली

अब तो बस ये देखना है क्या दिखाती है क़ज़ा
ज़िंदगी में ज़िंदगी की सारी साज़िश देख ली

ज़र ज़मीं जोरू की ख़ातिर हर ज़माने में 'कबीर'
एक माँ के हम ने दो बेटों में रंजिश देख ली