उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya ki har bala se musibat se bach gaya

दुनिया की हर बला से मुसीबत से बच गया

دنیا کی ہر بلا سے مصیبت سے بچ گیا

शायर: Kabeer Halati9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया की हर बला से मुसीबत से बच गया
लेकिन ये 'इश्क़ मेरे बदन को खुरच गया

वो दान दे के दुनिया में मशहूर तो हुआ
पर दान-वीर कर्ण का रक्षा-कवच गया

तलवार पर जब उस की कोई बोलता नहीं
मैं ने क़लम उठाई तो क्यूँ शोर मच गया

गीता पे हाथ रख के क़सम खा गया मगर
होंटों से तेरे उस की अदालत में सच गया

दुश्मन तो चाहता है मुझे मौत दे मगर
उस के हर एक वार से हर बार बच गया

तारीख़ जीत कर भी रक़म तू न कर सका
लेकिन मैं तुझ से हार के इतिहास रच गया

मेरी वफ़ाएँ उस को कभी पच नहीं सकीं
उस का हर इक फ़रेब मुझे कैसे पच गया

मेरी हँसी के बदले मुझे दे गया है अश्क
पानी वो अपने घर का मिरे घर उलच गया

जलने लगा है मुझ से 'कबीरा' मेरा रक़ीब
महबूब मेरा जब से मुझे करके टच गया