उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle ki meri jaan jawani guzre

इस से पहले कि मिरी जान जवानी गुज़रे

اس سے پہلے کہ مری جان جوانی گزرے

शायर: Kabeer Halati8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले कि मिरी जान जवानी गुज़रे
तेरे कानों से कभी मेरी कहानी गुज़रे

मेरा भी शे'र कोई तेरी ज़बानी गुज़रे
पहला मिसरा' न सही मिसरा'-ए-सानी गुज़रे

हम भी गुज़रे हैं मोहब्बत के इसी 'आलम से
तोड़ के जैसे किनारे कहीं पानी गुज़रे

इतनी ख़ामोशी से गुज़रे हैं तिरी राह से हम
जितनी ख़ामोशी से दरिया की रवानी गुज़रे

बस यही सोच के ग़ज़लें मैं कहा करता हूँ
तेरे होंटों से कभी काश ये बानी गुज़रे

काश इक रात वो महका के चली जाए मुझे
मेरे आँगन से कभी रात की रानी गुज़रे

सर्द इक आह मिरे लब से चली आती है
जब कोई याद मिरे दिल से पुरानी गुज़रे

प्यार भी तंज़ भी धोका भी नुमाइश भी 'कबीर'
इक तबस्सुम में तिरे कितने म'आनी गुज़रे