उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib haal mein baKHshi gain mujhe sansen

'अजीब हाल में बख़्शी गईं मुझे साँसें

عجیب حال میں بخشی گئیں مجھے سانسیں

शायर: Kabeer Halati7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजीब हाल में बख़्शी गईं मुझे साँसें
जहाँ घुटन है वहाँ कैसे कोई ले साँसें

ये आरज़ू भी मिरी हो नहीं सकी पूरी
कोई गले से लगा कर मिरी सुने साँसें

उसी ने चैन से जीने नहीं दिया हम को
वो जिस के नाम मोहब्बत में कर चुके साँसें

हर एक साँस तिरे नाम कर के जाता हूँ
क़ज़ा के बा'द मुबारक मिरी तुझे साँसें

अकेला मैं ही नहीं हूँ जो उस पे मरता हूँ
उसे तो देख के भरते हैं आइने साँसें

वो चाहता है कि कर दूँ इन्हें भी उस के नाम
जो मेरे पास हैं गिनती की चंद ये साँसें

इन्हें भी छीन ले ऐ मेरी ज़िंदगी मुझ से
जो बच गई हैं 'कबीरा' ये क्या करे साँसें