उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham-zada hai fasana mera

ग़म-ज़दा है फ़साना मिरा

غم زدہ ہے فسانہ مرا

शायर: Kabeer Halati10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म-ज़दा है फ़साना मिरा
जल चुका आशियाना मिरा

उन से उम्मीद ऐसी न थी
लूट लेंगे ख़ज़ाना मिरा

इस जहाँ को गवारा न था
उन के घर आना-जाना मिरा

रो रहा है तू अब किस लिए
तब तो कहना न माना मिरा

आज कल मेरा दुश्मन है जो
दोस्त है इक पुराना मिरा

मुझ को सदियों रुलाता रहा
एक पल मुस्कुराना मिरा

रास दुनिया को आया नहीं
खुल के हँसना-हँसाना मिरा

लग रहा है तिरे शहर से
उठ गया आब-ओ-दाना मेरा

'इश्क़ के फेर में तू न पड़
मुझ से कहता था नाना मिरा

ऐ 'कबीरा' मिरे बा'द भी
जग रहेगा दिवाना मिरा