उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere KHayal ka daman suKHan ne tham liya

तिरे ख़याल का दामन सुख़न ने थाम लिया

ترے خیال کا دامن سخن نے تھام لیا

शायर: Balmohan panday5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे ख़याल का दामन सुख़न ने थाम लिया
फ़िराक़ में भी मोहब्बत से ख़ूब काम लिया

हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर गिरा के परिंदों से इंतिक़ाम लिया

बिछड़ के तुम से कई बिछड़े लोग याद आए
दिया बुझा तो इन्हीं जुगनुओं से काम लिया

निगाह-ए-शौक़ की आमद हुई थी बस्ती में
हर एक चाँद ने फिर अपना अपना बाम लिया