उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera wasl hai mujhe be-KHudi tera hijr hai mujhe aagahi

तिरा वस्ल है मुझे बे-ख़ुदी तिरा हिज्र है मुझे आगही

ترا وصل ہے مجھے بے خودی ترا ہجر ہے مجھے آگہی (ردیف .. ے)

शायर: Jalaluddin Akbar3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरा वस्ल है मुझे बे-ख़ुदी तिरा हिज्र है मुझे आगही
तिरा वस्ल मुझ को फ़िराक़ है तिरा हिज्र मुझ को विसाल है

मैं हूँ दर पर उस के पड़ा हुआ मुझे और चाहिए क्या भला
मुझे बे-परी का हो क्या गला मिरी बे-परी पर-ओ-बाल है

वही मैं हूँ और वही ज़िंदगी वही सुब्ह ओ शाम की सर ख़ुशी
वही मेरा हुस्न-ए-ख़याल है वही उन की शान-ए-जमाल है