उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera hai kaam kaman mein use lagane tak

तिरा है काम कमाँ में उसे लगाने तक

ترا ہے کام کماں میں اسے لگانے تک

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरा है काम कमाँ में उसे लगाने तक
ये तीर ख़ुद ही चला जाएगा निशाने तक

मैं शीशा क्यूँ न बना आदमी हुआ क्यूँकर
मुझे तो उम्र लगी टूट फूट जाने तक

गए हुओं ने पलट कर सदा न दी मुझ को
मैं कितनी बार गया ग़ार के दहाने तक

तुझे तो अपने परों पर ही ए'तिबार नहीं
तू कैसे आएगा उड़ कर मिरे ज़माने तक

किया था फ़ैसला बुनियाद-ए-आशियाँ का 'नसीम'
हवाएँ तिनके उड़ा लाईं आशियाने तक