उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi to dil mein hai jo kuchh bayan karna hai

अभी तो दिल में है जो कुछ बयान करना है

ابھی تو دل میں ہے جو کچھ بیان کرنا ہے

शायर: Iftikhar Naseem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी तो दिल में है जो कुछ बयान करना है
ये बाद में सही किस बात से मुकरना है

तू मेरे साथ कहाँ तक चलेगा मेरे ग़ज़ाल
मैं रास्ता हूँ मुझे शहर से गुज़रना है

कनार-ए-आब मैं कब तक गिनूँगा लहरों को
है शाम सर पे मुझे पार भी उतरना है

अभी तो मैं ने हवाओं में रंग भरने हैं
अभी तो मैं ने उफ़ुक़ दर उफ़ुक़ बिखरना है

दिलेर हैं कि अभी दोस्तों में बैठे हैं
घरों को जाते हुए साए से भी डरना है

मैं मुंतज़िर हूँ किसी हाथ का बनाया हुआ
कि उस ने मुझ में अभी और रंग भरना है

हज़ार सदियों की रौंदी हुई ज़मीं है 'नसीम'
नहीं हूँ मैं कि जिसे पहला पाँव धरना है