उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apna sara bojh zamin par phenk diya

अपना सारा बोझ ज़मीं पर फेंक दिया

اپنا سارا بوجھ زمیں پر پھینک دیا

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपना सारा बोझ ज़मीं पर फेंक दिया
तुझ को ख़त लिक्खा और लिख कर फेंक दिया

ख़ुद को साकिन देखा ठहरे पानी में
जाने क्या कुछ सोच के पत्थर फेंक दिया

दीवारें क्यूँ ख़ाली ख़ाली लगती हैं
किस ने सब कुछ घर से बाहर फेंक दिया

मैं तो अपना जिस्म सुखाने निकला था
बारिश ने फिर मुझ पे समुंदर फेंक दिया

वो कैसा था उस को कहाँ पर देखा था
अपनी आँखों ने हर मंज़र फेंक दिया