उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tilism-e-halqa-e-sayyargan mein kya rahna

तिलिस्म-ए-हल्क़ा-ए-सय्यारगाँ में क्या रहना

طلسم حلقۂ سیارگاں میں کیا رہنا

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिलिस्म-ए-हल्क़ा-ए-सय्यारगाँ में क्या रहना
किसी की सल्तनत-ए-बे-अमाँ में क्या रहना

अलग जलाया है अपना चराग़ इस ख़ातिर
तमाम-उम्र सफ़-ए-दोस्ताँ में क्या रहना

न-जाने छीन ले कब हम से शाह का किरदार
फ़रेब-ए-उम्र तिरी दास्ताँ में क्या रहना

ये वक़्त लम्हा-ए-मौजूद का तसलसुल है
मलाल-ए-ख़्वाहिश-ए-आइंदगाँ में क्या रहना

अगर वो ख़ुर्रम-ओ-आबाद है तो फिर 'शहज़ाद'
हमें भी अब किसी कार-ए-ज़ियाँ में क्या रहना