उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tir-e-ulfat abhi kaman mein hai

तीर-ए-उल्फ़त अभी कमान में है

تیر الفت ابھی کمان میں ہے

शायर: Maham Khan4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तीर-ए-उल्फ़त अभी कमान में है
वो मिरे दिल नहीं धियान में है

रौंद कर आशियाना-ए-ग़मगीं
मौज-ए-दरिया भी इत्मिनान में है

वा'दा-ए-सुब्ह था मगर कम्बख़्त
हिज्र की रात दरमियान में है

अश्क आँखों में इस तरह ठहरे
जैसे चश्मा किसी चटान में है