उर्दू शायरी · ग़ज़ल

thi mere dil ki pyas tapish dasht ki na thi

थी मेरे दिल की प्यास तपिश दश्त की न थी

تھی میرے دل کی پیاس تپش دشت کی نہ تھی

शायर: Zafar Akbarabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थी मेरे दिल की प्यास तपिश दश्त की न थी
बुझती समुंदरों से ये वो तिश्नगी न थी

ख़ुद में मगन थे लोग कोई बे-ख़ुदी न थी
दीवानगी का ढोंग था दीवानगी न थी

रस्ता भी अब तो भूल गए अपने घर का हम
वारफ़्तगी तो थी मगर इतनी कभी न थी

अपनी सदा की गूँज थी सहरा-ए-ज़ीस्त में
उस के सिवा कहीं कोई आवाज़ ही न थी

दिल से 'ज़फ़र' हुआ था जो शो'ला सा इक बुलंद
था वो भी इक फ़रेब-ए-नज़र रौशनी न थी