उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum uske dhyan mein aaenge dhyan mein bhi na tha

हम उस के ध्यान में आएँगे ध्यान में भी न था

ہم اس کے دھیان میں آئیں گے دھیان میں بھی نہ تھا

शायर: Zafar Akbarabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम उस के ध्यान में आएँगे ध्यान में भी न था
यक़ीं का ज़िक्र तो क्या है गुमान में भी न था

ये पस्त थी भी तो क्या वो बुलंद था भी तो क्या
ज़मीं का हुस्न मगर आसमान में भी न था

वो साया जिस के लिए धूप से गुरेज़ किया
निशान उस का कहीं साएबान में भी न था

थकी थकी सी छतें थीं शिकस्ता दीवारें
सलामती का तो इम्काँ मकान में भी न था

परिंदे फिर भी फ़ज़ा में थे पर समेटे हुए
'ज़फ़र' मुख़िल कोई उन की उड़ान में भी न था