उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai to koshish yahi dil dasht-e-tamanna na bane

है तो कोशिश यही दिल दश्त-ए-तमन्ना न बने

ہے تو کوشش یہی دل دشت تمنا نہ بنے

शायर: Zafar Akbarabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है तो कोशिश यही दिल दश्त-ए-तमन्ना न बने
फिर भी बनता है जो वीराना तो वीराना बने

ख़ाक भी जल के हो परवाना फिर उस पर ये सितम
ग़ाज़ा-ए-शम्अ' भी ख़ाक-ए-पर-ए-परवाना बने

कुछ ढले रात जो उतरें तिरी नज़रें दिल में
कुछ बने बात जो तू ज़ीनत-ए-काशाना बने

जैसे सन्नाटों में दिल गुम है न हो गुम कोई
यूँ न सुनसान हो यूँ घर कोई सहरा न बने

वो जो चाहे तो मिले दौलत-ए-बेदार-ए-जुनूँ
वो न चाहे तो कोई किस तरह दीवाना बने

सोचते हैं कि इस इक बात को हम दें क्या नाम
जो हक़ीक़त में ढले और न अफ़्साना बने

कौन सीने से लगाए फिरे इस दिल को 'ज़फ़र'
होश में आ के भी जो होश से बेगाना बने