उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har qadam par ek naya dukh KHair-KHwahon se mila

हर क़दम पर इक नया दुख ख़ैर-ख़्वाहों से मिला

ہر قدم پر اک نیا دکھ خیر خواہوں سے ملا

शायर: Zafar Akbarabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर क़दम पर इक नया दुख ख़ैर-ख़्वाहों से मिला
कब हमें कोई तहफ़्फ़ुज़ उन पनाहों से मिला

ख़ुद-नुमाई के सिवा क्या कज-कुलाहों से मिला
सिर्फ़ इक झूटा तफ़ाख़ुर था जो शाहों से मिला

लोग ख़ाली हाथ आए हैं जहाँ से लौट कर
दर्द का तोहफ़ा हमें उन बारगाहों से मिला

एक मरकज़ पर हुए यकजा कहाँ पस्त-ओ-बुलंद
कब फ़क़ीरों का सितारा बादशाहों से मिला

ज़िंदगी भर हम रहे महव-ए-सफ़र लेकिन 'ज़फ़र'
मंज़िलों से कुछ हुआ हासिल न राहों से मिला